Navigation

 admin@harekrishnabooks.store  +91-94298 29020

भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु का शिक्षामृत

भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु का शिक्षामृत

By कृष्णकृपामूर्ति श्री श्रीमद् ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद
 120

सदियों से बहुत से अवतार - दैवी शक्तियों से प्रेरित आचार्य और भगवान् के अवतार संसार में अवतरित हुए हैं , परन्तु किसी ने भी स्वर्णिम अवतार भगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु की तरह भगवत् प्रेम नहीं बाँटा ( महाप्रभु का अर्थ महान् स्वामी ) ।


श्री चैतन्य महाप्रभु का प्राकट्य १४८६ में बंगाल में हुआ और उन्होंने लोगों की आध्यात्मिक चेतना में क्रान्ति ला दी , और उनकी कालातीत शिक्षाओं का प्रभाव आज तक चला आ रहा है । भगवान् चैतन्य ने भगवान् के पवित्र नाम के सामूहिक कीर्तन का प्रवर्तन इस युग के लिए निर्धारित पद्धति के रूप में किया , जो कि एक ऐसी व्यावहारिक प्रक्रिया है , जिसका आचरण कोई भी व्यक्ति द्वारा भगवान् से सीधे जुड़ने के लिए किया जा सकता हैI

यद्यपि वे स्वयं पूर्णतया वैरागी संन्यासी थे , फिर भी उन्होंने बताया कि मनुष्य किस तरह अपने घर में , पेशे में और सामाजिक व्यवहारों में धार्मिक चेतना के साथ कार्य कर सकता है । यह पुस्तक इस महान् संत के असाधारण जीवन का वर्णन करती है और उनकी शिक्षाओं की संक्षेप में व्याख्या करती है ।


Share:
Nameभगवान् श्री चैतन्य महाप्रभु का शिक्षामृत
PublisherBhaktivedanta Book Trust
Publication Year1982
BindingPaperback
Pages303
Weight292 gms
ISBN9789382176107

You May Also Like